Monday, May 12, 2014

Gilgit- Balochistan: Political stagnation and People's Action Committee गिलगित बलतिस्तान: राजनीतिक गतिरोध और अवामी एक्शन कमेटी

सेंगे हुसैन सेरंग
10 मई, 2014












1 मई: सीनेट की मानवाधिकार के लिए स्थायी समिति के नौ सदस्य आजकल गिलगित बलतिस्तान के दौरे पर हैं। गिलगित शहर में अवामी एक्शन कमेटी के सदस्यों ने सीनेटर साहिबान से मुलाकात की और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की।  बातचीत के दौरान सीनेटर अफरासियाब ख़टक ने स्वीकार किया कि गिलगित बलतिस्तान के संस्थानों को विधायी और स्थानीय मामलों को चलाने की आज़ादी नहीं। इनके अनुसार इस्लामाबाद की इजाज़त के बिना यहाँ एक चपरासी भी नियुक्त नहीं हो सकता। उन्होंने सुझाव दिया कि इस्लामाबाद में मौजूद जीबी(गिलगित बलतिस्तान) कौसिल के अधिकारों को गिलगित में मौजूद संविधान निर्माण सभा को स्थानांतरित किए जाए, अगर पाकिस्तान के संविधान में संशोधन कर के जीबी को देश का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता तो फिलहाल गिलगित बलतिस्तान को आज़ाद कश्मीर की तर्ज़ पर अंतरिम संविधान दिया जाए।
अवामी एक्शन कमेटी जिसका नेतृत्व सफदर अली, बाबा जान हनज़ई और वजाहत अली कर रहे थे, ने सीनेटर साहिबान को अवामी एक्शन कमेटी की मांगों से अवगत कराया। और बता दिया कि गिलगित बलतिस्तान एक गरीब क्षेत्र है। कई युद्धों और हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच विवादों की वजह से इस क्षेत्र में आर्थिक सुधार की दिशा में काम नहीं हो सका। राजनीतिक संघर्ष के कारण लद्दाख, कश्मीर और वा खान की तरफ खुलने वाले व्यापारिक रास्ते बंद हैं जिसका स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इसके निवारण के लिए 1948 से स्वीकृत खाद्य पर सब्सिडी को बनाए रखना बहुत ज़रूरी है। 
 

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