Monday, May 12, 2014

Indian Civilization and Muslims हिंदुस्तानी तहजीब और भारतीय मुसलमान



अभिजीत, न्यु एज इस्लाम
9 मई, 2014
"वह दीने-हिजाजी का बेबाक बेड़ा । निशां जिसका अक्साए-आलम में पहुँचा।।
मजाहम हुआ कोई खतरा न जिसका, न अम्मां में ठटका, न कुल्जम में झिझका।।
किये पै सिपर जिसने सातों समंदर। वह डूबा दहाने में गंगा के आकर।।"

अर्थात् "अरब देश का वह निडर बेड़ा, जिसकी ध्वजा विश्वभर में फहरा चुकी थी, किसी प्रकार का भय जिसका मार्ग न रोक सका था, जो अरब और बलूचिस्तान की मध्य वाली अम्मान की खाड़ी में भी नहीं रुका था और लालसागर में भी नहीं झिझका था, जिसने सातों समंदर अपनी ढ़ाल के नीचे कर लिये थे, वह श्रीगंगा जी के दहाने में आकर डूब गया था।"
    
मौलाना अल्ताफ हाली की इन पंक्तियों को पढ़ने से तो ये लगता है कि वह इस्लाम जिसने सारी दुनिया पर अपनी विजय पताका फहराई थी वह भारत में आकर पराजित हो गया। इसलिए हाली की इन पंक्तियों पर लोग सवाल खड़े कर सकते है कि आज जबकि भारतीय उपमहाद्वीप में मुसलमानों की भारी तादाद है, जो अरब और मध्यपूर्व के दर्जनों मुस्लिम देशों की कुल आबादी से भी ज्यादा है, यानि आबादी के लिहाज से तो इस्लाम सबसे ज्यादा इस उपमहाद्वीप में ही फैला तो फिर इस्लाम यहां पराजित कैसे हुआ?  मौलानी हाली की लिखी इन पंक्तियों का अर्थ क्या है ? ये वो बुनियादी सवाल है जो हाली की उपरो


 

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