Indian Civilization and Muslims हिंदुस्तानी तहजीब और भारतीय मुसलमान
अभिजीत, न्यु एज इस्लाम
9 मई, 2014
"वह दीने-हिजाजी का बेबाक बेड़ा । निशां जिसका अक्साए-आलम में पहुँचा।।
मजाहम हुआ कोई खतरा न जिसका, न अम्मां में ठटका, न कुल्जम में झिझका।।
किये पै सिपर जिसने सातों समंदर। वह डूबा दहाने में गंगा के आकर।।"
अर्थात्
"अरब देश का वह निडर बेड़ा, जिसकी ध्वजा विश्वभर में फहरा चुकी थी, किसी
प्रकार का भय जिसका मार्ग न रोक सका था, जो अरब और बलूचिस्तान की मध्य वाली
अम्मान की खाड़ी में भी नहीं रुका था और लालसागर में भी नहीं झिझका था,
जिसने सातों समंदर अपनी ढ़ाल के नीचे कर लिये थे, वह श्रीगंगा जी के दहाने
में आकर डूब गया था।"
No comments:
Post a Comment