Monday, May 12, 2014

Blasphemy Madness: Islamist Extremists have complete impunity in Pakistan विध्वंस का शिकार समाज और राज्य


मुजाहिद हुसैन, न्यु एज इस्लाम
9 मई, 2014
मुल्तान में राशिद रहमान की हत्या पाकिस्तान में धर्म के आधार पर फैलती हुई हिंसा की एक खतरनाक मिसाल है। राशिद रहमान का जुर्म ये था कि वो एक ऐसे आरोपी के वकील थे जिस पर तौहीने (अपमान या ईशनिंदा) का मुकदमा चल रहा है। चूंकि हमारे यहां गलत तरीके से वकील को मुवक्किल का साथी समझा जाता है, इसलिए धर्म के नाम पर हिंसा और मार काट का कारोबार करने वालों ने इस वकील की हत्या कर दी जिसने खुद कोई जुर्म नहीं किया था और अपने पेशे की बुनियादी ज़रूरतों के मुताबिक़ एक मुवक्किल जिस पर अभी आरोप साबित होना बाकी है, की मुकदमेबाज़ी में मदद कर रहा था। याद रहे कि एक पूर्व न्यायाधीश आरिफ इकबाल भट्टी की भी कुछ समय पहले लाहौर में बेदर्दी के साथ हत्या कर दी गई थी क्योंकि उन्होंने तौहीन के एक झूठे मुकदमे का फैसला सुनाते हुए आरोपियों को बरी कर दिया था। यहीं पर बस नहीं बल्कि दो साल पहले उच शरीफ में एक पागल व्यक्ति को तौहीन के आरोप में जिंदा जला दिया गया, हालांकि शरीयत के अनुसार किसी मानसिक रूप से असंतुलित व्यक्ति को तौहीन के आरोप में सज़ा नहीं दी जा सकती। मुझे अच्छी तरह याद है 1996 में गुजराँवाला में एक हाफिज़े कुरान फारूक अहमद को महज़ इसलिए एक हिंसक भीड़ ने पहले पुलिस की हिरासत से छुड़ाकर बेदर्दी के साथ हत्या की फिर उसकी लाश को जलाया गया और बाद में एक मोटर साइकिल के पीछे बांधकर पूरे शहर की गलियों में घसीटा। क़त्ल किया गया व्यक्ति एक अताई (नीम हकीम)  डॉक्टर था और जब इस पर तौहीन का आरोप लगाया गया तो एक मदरसे की मस्जिद के लाउडस्पीकर से एक छात्र ने ऐलान किया कि बदबख्त अताई डॉक्टर ने कुरान को शहीद कर दिया। सुनने वालों ने अताई शब्द को ईसाई समझा और उस हाफिज़े कुरान की हत्या करके उसकी लाश जला दी। लेकिन किसी एक भी ऐसी घटना के बाद किसी ज़िम्मेदार को सज़ा नहीं दी जा सकी क्योंकि पुलिस और अदालतों पर धार्मिक हिंसक चरमपंथियों का दबाव था। मुल्तान का ताज़ा शिकार राशिद रहमान के हत्यारे सबसे पहले तो पकड़े ही नहीं जाएंगे और अगर कहीं पुलिस के हत्थे चढ़ भी गए तो कोई अदालत उन्हें सज़ा नहीं दे सकेगी और इस तरह एक और निर्दोष व्यक्ति आतिवादियों का निशाना बन गया है।


 

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