| Hindi Section | |
| 08 Sep 2011, NewAgeIslam.Com | |
| मज़हब की समझ पर सवाल | |
असद मुफ्ती (उर्दू से हिंदी अनुवाद- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम डाट काम) |
| मज़हब की समझ पर सवाल | ||
इस्लाम के आने के सदियों बाद आने वाले फुक़हा (इस्लामी धर्मशास्त्रों के जानकार) ने औरत को जो मुक़ाम दिया है वोखासा विवादास्पद है। ये बात कहे बगैर कोई चारा नहीं है कि औरत के बारे में हमारी दीनी समझ घटिया, पुरानी,सामंती और बदले व भेदभाव पर आधारित है। यही वजह है कि इस फिक़ही लिटरेचर के ज़ेरे साया पाकिस्तानी समाजमें औरत के बारे में एक ताक़तवर लेकिन घटिया सोच पैदा की गयी है। और ये घटिया सोच न सिर्फ पाकिस्तान मेंअपना घर बना चुकी है बल्कि इसकी सरहदों से बाहर पश्चिम में भी अपना रंग दिखा रही है। हम जहाँ जाते हैं इसघटिया सोच की गठरियाँ अपने सिर पर उठाये लिये जाते हैं। --असद मुफ्ती (उर्दू से हिंदी अनुवाद- समीउर रहमान,न्यु एज इस्लाम डाट काम http://newageislam.com/NewAgeIslamHindiSection_1.aspx?ArticleID=5433 | ||
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