Friday, June 22, 2012

मुसलमानों की गिरती शरह पैदाइश तशवीशनाक, Hindi Section, NewAgeIslam.com

Hindi Section
मुसलमानों की गिरती शरह पैदाइश तशवीशनाक

सैफ शाहीन, न्यु एज इस्लाम

एक आम मुसलमान ख़ानदान का आपके ज़हेन में क्या तसव्वुर होगा? ख़ुदा से डरने वाला शौहर, जाहिल बीवी (या बीवियां), और बड़ी तादाद में दरवाज़े को तोड़ कर घर से बाहर सड़कों पर आ रहे बच्चे? ताहम, ऐसा नहीं है जैसा कि एक आम मुसलमान ख़ानदान के बारे में तसव्वुर किया जाता है या आने वाले सालों में ऐसा नज़र नहीं आएगा।

नई तहक़ीक़ ने दुनिया भर में मुस्लिम ख़वातीन की शरह पैदाइश या बच्चों की पैदाइश की तादाद में तारीख़ी एतबार से ग़ैरमामूली कमी को ज़ाहिर की है, मशरिक़े वुस्ता जैसे मुस्लिम अक्सरीयत वाले ममालिक में कमी ने पहले से ही मग़रिब के बराबर ला खड़ा किया है जहाँ बुज़ुर्गों की तादाद ज़्यादा है। ऐसे भी ख़दशात हैं कि शरह पैदाइश में मज़ीद कमी आएगी।

इस रुजहान के सख़्त मन्फ़ी असरात सामने हैं। जैसे, एक, मुस्लिम मुआशरों में काम करने वाली आबादी की तादाद कम हो रही है, क्योंकि कम बच्चे पैदा हो रहे हैं जो उनको ऐसे हालात की तरफ़ ले जा रहा है जैसा मग़रिबी ममालिक सामना कर चुके हैं। दो, जबकि मग़रिब ममालिक ने पहले से ही तालीम, तरक़्क़ी, और ख़ानदान की आमदनी की आली सतह को हासिल कर चुके हैं, और एशिया और अफ़्रीक़ा में ज़्यादा तर मुस्लिम ममालिक की बड़ी आबादी के नाख़्वान्दा, पसमांदा और ख़ानदान की इंतेहाई कम आमदनी के बावजूद आबादियाती जमूद का सामना कर रहे हैं।

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