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शादी और तलाक से सम्बंधित कई हदीसों की पैगम्बर स.अ.व की अज़वाजे मुतह्हेरात (पत्नियों) और खासतौर से हज़रते आयशा रज़ि. से रवायत है। अगर किसी महिला को इस तरह के मसले की मुनासिब समझ नहीं होती है तो फिर इस तरह की हदीसों को फुकहा ने क्यों कुबूल किया है? इसे रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि इन हदीसों की रावी एक महिला है। इसके अलावा ये इस्लामी इतिहासकारों के भी इल्म में है कि पैगम्बर मोहम्मद स.अ.व. कई मामलों में अपनी अज़वाजे मुतह्हेरात (पत्नियों) से सलाह किया करते थे। -- असगर अली इंजीनियर(अंग्रेज़ी से अनुवाद- समीउर रहमान, न्यु एज इस्लाम डाट काम) http://www.newageislam.com/NewAgeIslamHindiSection_1.aspx?ArticleID=6361 | |||||||||||||
Thursday, January 12, 2012
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