Tuesday, May 6, 2014

Muslims Should Behave Rationally , Not Just Emotionally मुसलमानों को केवल भावनात्मक ही नहीं बल्कि तार्किक व्यवहार करना चाहिएः डा. मुबारक हैदर

न्यु एज इस्लाम न्यूज़ ब्यूरो
26 अप्रैल, 2014
न्यु एज इस्लाम के एडिटर सुल्तान शाहीन और पाकिस्तान के विचारक, लेखक और कार्यकर्त्ता डा. मुबारक हैदर
न्यु एज इस्लाम फाउंडेशन ने दिल्ली स्थिति अपने कार्यालय परिसर में मशहूर पाकिस्तानी बुद्धिजीवी मुबारक हैदर  के एक व्याख्यान का आयोजन किया। मुबारक हैदर दो मौलिक किताबों तहज़ीबी नरगिसीयत और मोबाल्ग़े मुग़ालते के लेखक हैं और जिसे पूरी दुनिया में आधुनिक प्रगतिशील मुसलमानों के बीच बोद्धिकता के पुनरुद्धार, तार्किक सोच और बौद्धिक आत्मनिरीक्षण को पैदा करने वाली किताब माना जाता है। मुबारक हैदर साउथ एशिया फ्री मीडिया एसोसिएशन, लाहौर के डॉरेक्टर भी हैं।
कार्यक्रम के शुरू में न्यु एज इस्लाम फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी और न्यु एज इस्लाम के एडिटर सुल्तान शाहीन ने हिंदू मुस्लिम विद्वानों, पत्रकारों और लेखकों की मिली जुली सभा के सामने मेहमान मुबारक हैदर का परिचय पेश किया। उन्होंने इस प्रोग्राम के लिए निमंत्रण स्वीकार करने पर डा. मुबारक हैदर का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया।
सुल्तान शाहीन ने डॉ. मुबारक हैदर का स्वागत करते हुए व्याख्यान में मौजूद लोगों के सामने पाकिस्तानी मुस्लिम बुद्धिजीवियों की बहादुरी की सराहना की, जो इस्लाम के बारे में सच्चाई को बयान कर रहे हैं और कट्टरपंथियों से मुकाबला करने के लिए वास्तव में अपनी गर्दन को तलवार की धार पर रख रहे हैं। उन्होंने कहा, "मेरे विचार में ये और भी अधिक सराहनीय है क्योंकि इस लड़ाई में भारतीय मुस्लिम बुद्धिजीवियों की भागीदारी बहुत कम है, हालांकि हिंदुस्तान में कट्टरपंथी इस स्थिति में नहीं हैं कि वो हिंसा पर उतर आएं।"
डा. मुबारक हैदर ने अपनी किताब ''तहज़ीबी नरगिसीयत' के विशेष संदर्भ में अपने विचारों को व्यक्त किया, इस किताब का  उन्होंने खुद अंग्रेज़ी में अनुवाद किया है जिसका नाम "Civilizational Narcissism" है। अपनी किताब की बुनियादी बातों की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि इस पुस्तक का उद्देश्य मुसलमानों के मौजूदा मानसिक दिवालियेपन को उजागर करना है, और जो गहरे भ्रम और आत्म मोह के रोग का शिकार हैं। उन्होंने कहा कि हम मुसलमान बुरी बातें अगर इन्हें इस्लाम की आड़ में पेश किया जाए उनका भी औचित्य पेश करने की कोशिश करते हैं और सार्वभौमिक मूल्यों और आधुनिक मानवाधिकार को गैर इस्लामी, तिरस्कार और इसे बुरा समझते हैं। अपनी शुरुआती टिप्पणी में डा. मुबारक हैदर ने कहा कि, आधुनिक दुनिया की तेज़ी से बदल रही और गतिशील रूप से उभरती वास्तविकताओं के विपरीत हम अपने आप पर गर्व करते हैं और हम अपने अतीत में गुम रहते हैं और जो आवश्यकताएं और ज़िम्मेदारियाँ आधुनिक युग हमारे सामने रखता है हम उनको पूरा करने के अनिच्छुक हैं। 

 

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