Sunday, February 5, 2012


Hindi Section
03 Feb 2012, NewAgeIslam.Com
सलमानम रुश्दी विवादः हिंदुस्तान भी इस्लामोफासिज़्म के खतरे से महफूज़ नहीं

सुल्तान शाहीन, एडिटर, न्यु एज इस्लाम डाट काम

24 जनवरी, 2012

सलमान रश्दी को जयपुर लिटरेरी फेस्टिवल में जमा हुए लेखकों और उनके चाहने वालों से वीडियो लिंक के ज़रिए से बात करने की इजाज़त नहीं दी गई। यह हमारे देश के लिए शर्म की बात है और इससे भी ज़्यादा हमारी कौम के लिए है। हमारे देश के लिए शर्म की बात इसलिए है क्योंकि न तो हमारे पास संसाधन हैं और न ही दुनिया में अपनी किस्म के बेहतरीन एक लिटरेरी फेस्टिवल को गैंगस्टर और माफियाओं की हिंसा की धमकी से हिफ़ाज़त करने की हिम्मत है। हमारी कौम के लिए शर्म की बात इसलिए है क्योंकि हमारे बीच मज़हबी ठग हैं जो एक नुक्सान न करने वाली तकरीब को इसलिए चैलेंज कर रहे हैं, क्योंकि वह एक लेखक है जिसने हमारे नबी करीम (स.अ.व.) की तौहीन की है - ऐसी तौहीन जो हम बिना एहसास किए हर दिन, हर मिनट, आमतौर से करते हैं और जिस प्रकार के भ्रष्ट हम लोग हैं, अपने बुरे कामों की वजह से खुदा के सामने ताल ठोंकते हैं और इस्लाम को बदनाम करते हैं। समारोह से कोई नुक्सान होने वाला नहीं था क्योंकि सलमान रश्दी कोई विवादास्पद मुद्दा उठाने, सेटेनिक वर्सेज़ के बारे में बोलने या उसे पढ़ने नहीं जा रहे थे। -- सुल्तान शाहीन, एडिटर, न्यु एज इस्लाम डाट काम

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